ज़िन्दगी काटों का सफ़र है,हौसला इसकी पहचान है,

रास्ते पर तो सभी चलते है, जो रस्ते बनाये वो ही इंसान है.











साधना सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के चंदौली जिले में एक छोटे से गाँव बल्लीपुर में १७ अगस्त १९७४ को हुआ था | उनके पिता का नाम स्वर्गीय कैलाश भूषण सिंह और माता का नाम श्रीमती इंदुमती सिंह है | साधना सिंह बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी थी , उन्हें अपनी भाषण प्रतिभा के लिए कई बार सम्मानित किया जा चूका है |


साधना सिंह ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा आजमगढ़ के चिल्ड्रेन सेकेंडरी हायर एजुकेशन से ली | उनके पिता पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर थे इसलिए साधना सिंह को भी अपना स्कूल स्थानानतरण करना पड़ता था | साधना सिंह ने अपनी १२ तक की शिक्षा चंदौली के कन्या इंटर कॉलेज से ली थी | साधना सिंह ग्रेजुएट है |


साधना सिंह की शादी छविनाथ सिंह से हुई है | उनके पति पेशे से अध्यापक हैं , साधना सिंह के ३ बच्चे हैं जिनके नाम अमन , नमन , ज्योत्सना है | उनका बड़ा बेटा पेशे से सॉफ्टवेर इंजिनियर है |






साधना सिंह १९९२ में रामजन्म भूमि आन्दोलन से भाजपा के साथ जुडी | साधना सिंह इस दौरान बहुत सक्रिय भी रही | साधना सिंह को १९९५ में वाराणसी भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया |


साधना सिंह २००० में भाजपा की जिलामंत्री एवं २००२ से २००८ तक महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष भी रह चुकी हैं | साधना सिंह को २०११ से २०१४ तक दोबार भाजपा का जिला उपाध्यक्ष बनाया गया | २०१४ में यूपी बीजेपी ने उन्हें प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के तौर पर भी चुना , साधना सिंह को २०१६ में दोबारा प्रदेश कर्यसमिती सदस्य के तौर पर चुना गया |


साधना सिंह २००० में जिलापंचायत सदस्य के तौर पर सकलडीहा के सेक्टर नंबर 2 से नवनिर्वाचित हुई थी | इस दौरान उन्होंने पुरे चंदौली में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी | साधना सिंह को २००७ में जिला उद्योग व्यापार मंडल की जिलाध्यक्ष के तौर पर चुना गया | इस दौरान साधना सिंह ने पुरे चंदौली जिले में संगठन का विस्तार किया | साधना सिंह ने ४२ नयी व्यापार मंडल की इकाइयों को बनाया | साधना सिंह के जिलाध्यक्ष बनने के बाद से व्यापारियों पर उत्पीडन बंद हो गया |


साधना सिंह वर्तमान में 380 मुगलसराय विधानसभा से विधायक हैं तथा बीजेपी में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य है | साधना सिंह व्यापार मंडल की जिलाध्यक्ष भी हैं






साधना सिंह ने 2002-03 में जिला बचाओ आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभायी थी | साधना सिंह और उनकी टीम के आन्दोलन के वजह से ही तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा | जिला बचाओ आन्दोलन के दौरान साधना सिंह पर ३७ मुक़दमे भी लगे , फिर भी साधना का मनोबल नहीं टूटा और जनता के लिए उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा |


साधना सिंह ने बिजली , पानी और सड़क के मुद्दों पर सैकड़ों बार अपने दम पर धरना प्रदर्शन भी किया है | उनके धरना प्रदर्शन और विरोध के कारण कई बार बिजली , पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से चलने लगी थी |


साधना सिंह को जब २००७ में व्यापार मंडल का जिलाध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने व्यापारियों के मुद्दों को सड़क से लेकर सरकार तक उठाया | इस दौरान उन्होंने व्यापारियों पर सैंपलिंग अफसरों द्वारा मनमानी पर भी अंकुश लगाया | साधना सिंह ने इस दौरान कई अफसरों के खिलाफ धरना प्रदर्शन देकर उनको नियंत्रित भी किया | चंदौली जिले के सभी व्यापारी आज सकुशल अपना रोजगार चला पा रहे हैं , उसमे साधना सिंह की बहुत अहम भूमिका है|


श्रीमती सिंह ने जब जिले से कोर्ट और तहसील स्थानातरण हो रहा था तो उन्होंने अधिवक्ता आन्दोलन में अपना सहयोग दिया | इस दौरान उन्होंने अधिवक्ता बंधुओं के इस आन्दोलन में व्यापार मंडल का समर्थन भी दे दिया | जिससे अधिवक्ताओं का आन्दोलन और धार पकड़ लिया |


चंधासी कोयला मंडी (जो की एशिया की सबसे बड़ी मंडी है) में कोयला पर टैक्स बढ़ने से व्यापारी प्रभावित हुए थे | जिसके कारण उन्होंने यूपी सरकार के खिलाफ आन्दोलन किया | साधना सिंह ने इस आन्दोलन में सबसे सक्रिय भूमिका निभायी | इस दौरान साधना सिंह को वाराणसी के चौका घाट में १४ दिनों जेल में रहना पड़ा |



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